हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था – विनोद कुमार शुक्ला (‘A man had sat down weakened by despair’ -Vinod Kumar Shukla)

हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था
व्यक्ति को मैं नहीं जानता था

हताशा को जानता था

इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया

मैंने हाथ बढ़ाया

मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ

मुझे वह नहीं जानता था

मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था

हम दोनों साथ चले

दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे

साथ चलने को जानते थे l

 

A man had sat down

Weakened by despair

I did not know him
I knew despair
I went to him

extended my hand

Taking it

He stood up

he did not know me

he knew me extending my hand

We started walking together
Both did not know each other

We knew ‘walking together’

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पानी की चादर

हवा जो लेकर बरसात अाई
मुझे भी लौटा अपने साथ लाई

मैं जो उलझा हुअा था फंदो में
खुद को पाता कहां गैर बंदों में
पानी की चादर ने सब धो डाला
मुझे खुद ही में से बाहर निकाला
मन-मयूर नाचा, दिल ने रागिणी गाई

हवा जो लेकर बरसात अाई
मुझे भी लौटा अपने साथ लाई

झूमते जब हैं ये पेड सारे
बना कुछ खूबसूरत मेरे प्यारे
ये हर्षाते हैं, इनका मान रहे
कल्पना की ऊंची उड़ान रहे
हाथ पे हाथ धरे किसने कस्तूरी पाई

हवा जो लेकर बरसात अाई
मुझे भी लौटा अपने साथ लाई

Animate – Inanimate

My son is 2 year old. His talking is limited to monosyllabic words. Smattering of Hindi and English words which he hears us using. He talks to his toy puppy in the same manner as he talks to any person. He takes the toy puppy to stroll. Shows it his dance. Seems kids that young are just happy 🙂 Happy to be alive. And sharing that happiness with anyone or anything.

Today the kid was having breakfast. The toy puppy was lying in the other corner of the room. The kid exhorted the puppy to come over and have the food as it was very tasty. Here is the exact one line conversation which was repeated quite sometime until the kid got bored of toy puppy not listening to it and gave up:

Puppy. Aao. Khana. Tasty.

*Aao = Come; Khana = Food

You can imagine that line of conversation with body gestures and pauses of a kid 🙂

An English Gazal

They live on nothing, but your name

They go on killing, no mercy, no shame

For times immemorial, it has been on

Nations, Religions, Violence is a game

Life is beautiful, you are with me

Love is an animal, difficult to tame

Your smile, twinkling in brown eyes

Not from this world, how can I frame

Mountains, River, Tree, Birds

Enjoy forever, Stake no claim

31 अगस्त 2015 की डायरी

आज दीक्षा बासु के लिखे कुछ लेख पढ़े. दीक्षा लेखक हैं. आपकी एक किताब छप चुकी है. आप विख्यात अर्थशास्त्री कौशिक बासु की बेटी हैं.

दीक्षा कुछ साल मुंबई रहकर अभिनेत्री बनने के लिए स्ट्रगल कर चुकी हैं. कहती हैं की ज़्यादातर लोगों को स्ट्रगल करने की आदत सी हो जाती है. ये जानते हुए भी की उन्हें काम नहीं मिल रहा है और शायद मिलेगा भी नहीं। खुद को छलते रहते हैं. ऑडिशन देते रहते हैं.

अपने एक दूसरे लेख में एक नॉर्वेजियन लेखक के बारे में लिखती हैं. बताती हैं की कैसे उसने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और अपने विचारों को लिखकर शोहरत और पैसा पाया।

जे. देविका सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज, त्रिवेंद्रम में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. आपने kaafila.org पर एक लेख में विरिंजम पोर्ट(Vizhinjam Port) बनाये जाने के नकारात्मक प्रभावों पर लिखा है. एक पाठक ने आपके तर्कों का विरोध किया है. आपने विस्तृत रूप में अपने तर्कों को समझाया है और ये भी बताया है की पूंजीवादी व्यवस्था कैसे समाज के लिए घातक होती है. बड़ी कम्पनियों के पास इतने संसाधन होते हैं की वे सरकारों पर भारी पड़ती हैं. विरिंजम पोर्ट अडानी समूह बना रहा है.

आज शिविका का जन्मदिन है. मेरी खुशकिस्मती है की मुझे शिविका मिली।