31 अगस्त 2015 की डायरी

आज दीक्षा बासु के लिखे कुछ लेख पढ़े. दीक्षा लेखक हैं. आपकी एक किताब छप चुकी है. आप विख्यात अर्थशास्त्री कौशिक बासु की बेटी हैं.

दीक्षा कुछ साल मुंबई रहकर अभिनेत्री बनने के लिए स्ट्रगल कर चुकी हैं. कहती हैं की ज़्यादातर लोगों को स्ट्रगल करने की आदत सी हो जाती है. ये जानते हुए भी की उन्हें काम नहीं मिल रहा है और शायद मिलेगा भी नहीं। खुद को छलते रहते हैं. ऑडिशन देते रहते हैं.

अपने एक दूसरे लेख में एक नॉर्वेजियन लेखक के बारे में लिखती हैं. बताती हैं की कैसे उसने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और अपने विचारों को लिखकर शोहरत और पैसा पाया।

जे. देविका सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज, त्रिवेंद्रम में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. आपने kaafila.org पर एक लेख में विरिंजम पोर्ट(Vizhinjam Port) बनाये जाने के नकारात्मक प्रभावों पर लिखा है. एक पाठक ने आपके तर्कों का विरोध किया है. आपने विस्तृत रूप में अपने तर्कों को समझाया है और ये भी बताया है की पूंजीवादी व्यवस्था कैसे समाज के लिए घातक होती है. बड़ी कम्पनियों के पास इतने संसाधन होते हैं की वे सरकारों पर भारी पड़ती हैं. विरिंजम पोर्ट अडानी समूह बना रहा है.

आज शिविका का जन्मदिन है. मेरी खुशकिस्मती है की मुझे शिविका मिली।

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